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सामाजिक विज्ञान नोट्स -रीट 2022 -हाड़ोती के चौहनों का इतिहास

परिचय

  • राजस्थान के दक्षिण पूर्वी भाग को हाड़ोती के नाम से जाना जाता हैं ।
  • प्रक्षाशनिक दृष्टि से कोटा बूंदी बारा झालावाड़ को शामिल किया जाता हैं ।
  • रियासती काल में पूरा हाड़ोती क्षेत्र बूंदी के अंतर्गत आता हैं ।
  • हाड़ोती क्षेत्र में बूंदा मीणा का शासन था इसलिए इसे बूंदी कहा गाया था।
  • रणकपुर अभिलेख में बूंदी का प्राचीन नेम वृंदावती था ।
  • 1241 में देवी सिंह चोहान ने बूंद मीणा को पराजित करके चोहान वंश की शाखा स्थापित की थी ।
  • देवी सिंह के बाद उसके पुत्र ने समर सिंह शासक बना था ।
  • समर सिंह के पुत्र जेत्र सिंह शासक बना था , इसने कोटा से शासक कोट्या भील को पराजित करके अपनी राजधानी बनाया था । इसके नाम पर ही कोटा का नाम कोटा पद था।

हिरोजी / हामू जी / हममीर सिंह

  • हामूजी के समय मेवाड़ के राणा लाख ने बूंदी पर आक्रमण कर दिया था । ओर राणा लाख पराजित हो गया था ।
  • लाखा ने ये प्रतिज्ञा की थी की जब तक में बूंदी के दुर्ग को मिट्टी में ना मिल दूँ में अन्न ओर जल ग्रहण नहीं करूंगा ।
  • इसके कारण राणा लाखा के सेनापति चिंतित होने लगे , इस प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए उन्होंने एक मिट्टी का बूंदी के दुर्ग बनवाया,ओर उस पर राणा लाखा ने छड़ाई की थी । जिसकी रक्षा के राणा लाखा का एक सेनीक , जो चोहान वंश की हाड़ा शाखा का था , की मृत्यु हो गई ।

बर सिंह

  • इसके द्वारा बूंदी bundi के तारागढ़ किले का निर्माण करवाया गया था ।
  • 1569 में बूंदी का शासक राव सुरजन हाड़ा बना जिसका अधिकर रणथंबोर पर भी था , ये मेवाड़ के अधीन शासक था।
  • अकबर ने जब रणथंबोर पर आक्रमण किया था , उस समय राव सुरजन सिंह हाड़ा ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी ।
  • राव सुरजन सिंह हाड़ा के शासन काल में ही बूंदी चित्रकला शैली का विकास हुआ।
  • राव सुरजन सिंह हाड़ा का दरबारी कवि चंद्रशेखर था , जिसन हममीर हठ ओर सुरजन चरित्र लिखा ।

रत्न सिंह

  • इसकी के शासन काल में बूंदी bundi में पशु पक्षी की चित्रकला का विकास हुआ था ।
  • रत्नसिंह को जहांगीर ने “रामराज ओर सरबुँदराई ” की उपाधि से नवाजा ।
  • रत्नसिंह को पुत्र माधो सिंह को 1631 में शाहजहाँ ने कोटा राज्य का शासन सोप दिया । कोटा राज्य का संस्थापक “माधोसिंघ” को माना जाता हैं ।
  • अनऋद्ध का पुत्र जोधसिंह हुआ , जोध सिंह गणगौर के त्योहार पर गणगौर की मूर्ति के साथ सेर करता हुआ डूब गया था । इसके लिए एक प्रसिद्ध कहावत हैं ” हाड़ो ले दुबयो गणगौर “
  • राजस्थान में मराठों का सर्वप्रथम प्रवेश बूंदी में उम्मेदसिंघ के काल में हुआ था ।
  • 1818 में विष्णु सिंह ने अंग्रेजों के साथ संधि कर ली थी ।
  • बूंदी के सुखमहल का निर्माण विष्णु सिंह ने करवाया था ।

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